भारत के विकास और प्रगति की यात्रा में अनेक ऐसे अवसर आते हैं जब हमें यह अनुभव होता है कि केवल सपनों से ही राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता, उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए ठोस योजनाओं और उन्हें जमीन पर उतारने की क्षमता की आवश्यकता होती है। इसी क्षमता का दूसरा नाम है इंजीनियरिंग। आज हम इंजीनियर डे मना रहे हैं और यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे देश की प्रगति में इंजीनियरों की कितनी बड़ी भूमिका है।
भारत में यह दिन महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी की जयंती पर मनाया जाता है। उन्होंने अपने ज्ञान और कौशल से भारत को नई दिशा दी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब संकल्प मजबूत हो और मेहनत निरंतर हो तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है। इंजीनियर डे केवल उनका स्मरण भर नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा को प्रेरणा देता है जो इस देश के लिए कुछ नया करना चाहता है। सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी को आज भी "आधुनिक भारत के विश्वकर्मा" के रूप में जाना जाता है
हमारे देश का इतिहास गवाह है कि चाहे बड़े-बड़े बांध हों, रेल की पटरियां हों, सड़कें हों, पुल हों या फिर आज का डिजिटल भारत, हर क्षेत्र में इंजीनियरों का योगदान आधारभूत रहा है। वे केवल मशीनों और तकनीक के जानकार नहीं होते, बल्कि समाज के वास्तविक निर्माता होते हैं। एक किसान को खेत तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई नहर के पीछे किसी इंजीनियर का ही परिश्रम छिपा होता है। किसी मरीज की जान बचाने वाली आधुनिक मशीन के पीछे भी किसी इंजीनियर का ही मस्तिष्क काम करता है।
आज भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसमें इंजीनियरों का योगदान अनमोल है। स्टार्टअप संस्कृति से लेकर स्पेस रिसर्च तक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर ग्रीन एनर्जी तक, हर जगह भारतीय इंजीनियर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। हमें इस बात पर गर्व है कि दुनिया की कई शीर्ष कंपनियों में भारतीय इंजीनियर नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं और वहीं अपने देश में भी नित नए आविष्कारों से राष्ट्र को सशक्त बना रहे हैं।
मीरा-भायंदर जैसे शहर भी इस बात के उदाहरण हैं कि जब विकास की योजनाओं को सही दिशा मिलती है तो उसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ता है। सड़कों का निर्माण हो, स्वच्छ पानी की व्यवस्था हो या शहरी ढांचे का आधुनिकीकरण, हर जगह इंजीनियरों की सूझबूझ दिखाई देती है। जब आम नागरिक सुविधा का अनुभव करता है, तब यह समझ में आता है कि किस तरह इंजीनियरिंग समाज को प्रतिदिन बेहतर बना रही है।
हमारे देश के युवाओं के लिए भी यह दिन एक संदेश है कि इंजीनियरिंग केवल डिग्री या नौकरी का साधन नहीं है, बल्कि यह देश सेवा का एक बड़ा माध्यम भी है। जब कोई युवा इंजीनियर बनने का सपना देखता है तो उसके सामने केवल अपना भविष्य सुरक्षित करने का ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी संकल्प होना चाहिए कि वह अपनी प्रतिभा से समाज और देश को मजबूत बनाएगा।
भारत का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि हम अपने इंजीनियरों को कितनी प्रेरणा देते हैं और उनके ज्ञान का कितना सदुपयोग करते हैं। यही समय है जब हमें उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे नए-नए शोध करें, नई-नई तकनीकें विकसित करें और देश को आत्मनिर्भर और शक्तिशाली बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
इंजीनियर डे हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल राजनेताओं या समाजसेवियों के कंधों पर ही नहीं टिका होता, बल्कि उन अनगिनत इंजीनियरों के परिश्रम पर भी आधारित होता है, जो दिन-रात बिना किसी प्रचार-प्रसार के काम करते रहते हैं। जब भी हम किसी मजबूत इमारत में बैठते हैं, किसी सुरक्षित पुल पर चलते हैं या किसी नई तकनीक का उपयोग करते हैं, तो हमें उन इंजीनियरों को नमन करना चाहिए जिनकी मेहनत ने यह सब संभव बनाया।
आज इस अवसर पर मैं यही कहना चाहूंगा कि हमें अपने इंजीनियरों पर गर्व है और हमें उनकी मेहनत और समर्पण का सम्मान करना चाहिए। यही असली श्रद्धांजलि होगी सर विश्वेश्वरैया जी को और यही भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी बनेगी।
नई टिप्पणी जोड़ें