भारत की पहचान उसकी विविधता और संस्कृति में निहित है। हर राज्य, हर क्षेत्र की अपनी परंपराएँ और त्योहार हैं जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। इन्हीं अद्भुत त्योहारों में से एक है ओणम, जो विशेष रूप से केरल में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
ओणम का पर्व भगवान वामन और महाबली राजा की कथा से जुड़ा हुआ है। महाबली एक पराक्रमी और दानवीर राजा थे, जो असुर कुल में जन्मे होने के बावजूद अपनी प्रजा के लिए भगवान तुल्य थे। उनके शासन में किसी को कोई कष्ट नहीं था। सब ओर सुख, शांति और समृद्धि थी। लेकिन उनकी बढ़ती शक्ति से देवता चिंतित हो उठे। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और महाबली से दान माँगने पहुँचे।
वामन जी ने महाबली से केवल तीन पग भूमि दान में माँगी। महाबली ने प्रसन्नता से यह दान स्वीकार कर लिया। तब वामन देव ने अपना रूप विराट कर लिया। पहले पग में उन्होंने धरती को नाप लिया, दूसरे पग में आकाश को और तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा तो महाबली ने अपना शीश झुका दिया। भगवान ने उनके त्याग और दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें पाताललोक का राजा बना दिया और यह वरदान दिया कि वर्ष में एक बार वे अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आएँगे। यही अवसर ओणम के रूप में मनाया जाता है।
ओणम की सबसे विशेष पहचान है पुष्पों से बनाई जाने वाली रंगोली, जिसे पूकलम कहा जाता है। हर घर के आंगन में फूलों से सजाया गया पूकलम आनंद और सौंदर्य का प्रतीक है। इसके साथ ही ओणम साध्या यानी पारंपरिक भोज का आयोजन किया जाता है, जिसमें केले के पत्ते पर कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाते हैं। यह भोजन केवल स्वाद नहीं बल्कि समृद्धि और सामूहिकता की भावना को दर्शाता है।
ओणम में नाव दौड़ (वल्लमकली), नृत्य, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारा और मिल-जुलकर खुशियाँ बाँटने का संदेश देता है। ओणम केवल केरल का त्योहार नहीं है बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, क्योंकि यह हमें सिखाता है कि चाहे हमारी परंपराएँ अलग हों, लेकिन उत्सव मनाने की भावना सबमें समान है।
इस पर्व से हमें जो सबसे बड़ी सीख मिलती है, वह है समर्पण, समानता और समाज के हर वर्ग के प्रति प्रेम। महाबली राजा की तरह हमें भी अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए और प्रजा की सेवा ही सर्वोच्च धर्म मानना चाहिए।
मिरा-भाईंदर जैसे महानगर में जहाँ विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं के लोग रहते हैं, वहाँ ऐसे त्योहार हमारी सामाजिक एकता को और मजबूत बनाते हैं। ओणम हमें यह याद दिलाता है कि विविधता में ही हमारी सच्ची शक्ति है।
इस अवसर पर मैं मिरा-भाईंदर और देश-विदेश में रहने वाले सभी नागरिकों को ओणम की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि यह पर्व हम सबके जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद लेकर आए।
नई टिप्पणी जोड़ें